
12 मई 2025 को वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि पर बुद्ध पूर्णिमा का पर्व देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। इस बार का संयोग और भी विशेष है, क्योंकि पूर्णिमा सोमवार को पड़ रही है और सुबह रवि योग का शुभ संयोग भी बन रहा है। हिंदू और बौद्ध दोनों ही धर्मों के लिए यह दिन अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है।
बुद्ध पूर्णिमा विशेष संयोग:
- पूर्णिमा तिथि आरंभ: 11 मई 2025, रात 8:02 बजे
- पूर्णिमा तिथि समाप्त: 12 मई 2025, रात 11:26 बजे
- रवि योग: 12 मई को सुबह 5:32 बजे से 6:17 बजे तक
- वार: सोमवार (शिव और चंद्रमा से विशेष जुड़ाव)
5 शुभ कार्य जो अवश्य करें:
- पवित्र स्नान और गंगा जल अभिषेक
यदि संभव हो तो गंगा या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करें। घर पर स्नान करते समय जल में गंगाजल मिलाएं और श्रीहरि विष्णु का ध्यान करें। - सत्यनारायण व्रत और पूजा
घर में भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप का पूजन करें, कथा श्रवण करें और प्रसाद वितरण करें। यह घर में सुख-शांति और समृद्धि बढ़ाता है। - श्रीविष्णु सहस्रनाम व गीता पाठ
भगवान विष्णु के हजार नामों का जाप और श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करने से अश्वमेध यज्ञ जितना पुण्य मिलता है। - चंद्रमा को अर्घ्य देना
रात में चंद्रमा को जल, दूध और अक्षत मिश्रित जल से अर्घ्य दें। यह मानसिक शांति, संतुलन और वैवाहिक सुख बढ़ाने में सहायक है। - दान-पुण्य और सेवा
ब्राह्मणों, गौसेवा केंद्रों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, जल पात्र, पंखा, चप्पल आदि का दान करें। इससे घर में लक्ष्मी जी का स्थायी वास होता है।
धार्मिक महत्व:
- भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण – तीनों घटनाएं इसी दिन हुई थीं।
- भगवान विष्णु के नौवें अवतार के रूप में पूजे जाते हैं भगवान बुद्ध।
- त्रयोदशी, चतुर्दशी और पूर्णिमा – इन तीन दिनों को पुष्करिणी तिथियां कहा गया है, जो संपूर्ण वैशाख मास का पुण्य देने में सक्षम होती हैं।
नोट: स्कंद पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति इन तीन तिथियों में स्नान-दान नहीं कर पाता, लेकिन वैशाख पूर्णिमा को सूर्योदय से पहले पवित्र स्नान करता है, उसे पूरे मास जितना पुण्य फल मिलता है।







