
पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को लेकर एक बार फिर चिंता जताई जा रही है। दरअसल, हाल ही में सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि पाकिस्तान के किराना हिल्स इलाके में न्यूक्लियर रेडिएशन लीक हुआ है। हालांकि पाकिस्तान सरकार और सेना ने इस दावे को खारिज कर दिया है। अमेरिका और भारत ने भी इसे झूठा बताया है, लेकिन फिर भी यह मामला चर्चा में बना हुआ है क्योंकि किराना हिल्स पाकिस्तान की परमाणु नीति में शुरू से ही अहम स्थान रखता है।

बताया जा रहा है कि भारत द्वारा पाकिस्तान के कुछ एयरबेस को निशाना बनाए जाने के दौरान किराना हिल्स में रेडिएशन की घटना सामने आई। इस बीच अमेरिकी ऊर्जा विभाग से जुड़ा एक विशेष विमान Beechcraft B350 AMS पाकिस्तान की वायुसीमा में उड़ता देखा गया, जिसका टेल नंबर N111SZ बताया गया। यह विमान एरियल रेडिएशन मापने में सक्षम होता है और न्यूक्लियर लीक के असर का विश्लेषण करता है। इस विमान की मौजूदगी ने रेडिएशन के दावों को और हवा दी।
यह भी चर्चा है कि यह विमान या तो अमेरिका ने खुद भेजा या फिर यह 2010 में पाकिस्तान को दिया गया था, जिसे अब पाकिस्तानी सेना इस्तेमाल कर रही है। इससे सवाल उठने लगे कि क्या रेडिएशन वाकई हुआ है, और अगर हां, तो उसे छुपाया जा रहा है?

साथ ही सोशल मीडिया पर एक और दावा वायरल हुआ कि मिस्र से बोरोन कंपाउंड मंगवाया गया है। बताया गया कि EGY1916 फ्लाइट के जरिए मिस्र से बोरोन आधारित कैमिकल्स पाकिस्तान पहुंचे हैं। बोरोन का इस्तेमाल न्यूक्लियर रेडिएशन को कंट्रोल करने के लिए किया जाता है। यह न्यूट्रॉन्स को अवशोषित कर न्यूक्लियर फिशन प्रक्रिया को धीमा करता है। चेर्नोबिल (1986) और जापान के फुकुशिमा (2011) हादसों में भी इसका इस्तेमाल हुआ था।
इन सभी घटनाओं के बीच एक बार फिर पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। पहले भी पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था और उसकी सेना की आतंकी संगठनों से कथित नजदीकियों की वजह से दुनिया भर में चिंता जताई जाती रही है। अब किराना हिल्स के रेडिएशन की खबरों ने इन आशंकाओं को और बढ़ा दिया है। प्रधानमंत्री मोदी पहले ही साफ कर चुके हैं कि अब पाकिस्तान का न्यूक्लियर ब्लैकमेल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे में अगर पाकिस्तान अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाता, तो उसे इसके गंभीर नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं।







