
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका (PIL) को खारिज करते हुए फिल्म की रिलीज़ का रास्ता साफ कर दिया है। याचिकाकर्ता का आरोप था कि फिल्म में इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है, जिससे देश में धार्मिक या सामाजिक तनाव पैदा हो सकता है।
हालांकि, अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि यह कलात्मक स्वतंत्रता (Artistic Freedom) में हस्तक्षेप करने का अनावश्यक प्रयास है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रचनात्मक अभिव्यक्ति को बिना ठोस आधार के सीमित नहीं किया जा सकता।
यह याचिका दिल्ली के वरिष्ठ अधिवक्ता शकील अब्बास ने दायर की थी, जिसमें फिल्म के निर्माता, निर्देशक तुषार अमरीश गोयल, अभिनेता परेश रावल, और सेंसर बोर्ड (CBFC) को पक्षकार बनाया गया था।
याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि फिल्म में ताजमहल और उससे जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं को गलत ढंग से प्रस्तुत किया गया है, जिससे जनमानस में भ्रम फैल सकता है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए निर्देशक तुषार अमरीश गोयल ने कहा,
“‘द ताज स्टोरी’ किसी कल्पना या अफवाह पर नहीं, बल्कि छह महीने के शोध और सत्यापित ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित है। CBFC ने फिल्म की हर जानकारी की गहन जांच के बाद मंजूरी दी है। हमारा उद्देश्य किसी तरह का विवाद नहीं, बल्कि इतिहास को नए दृष्टिकोण से दिखाना है।”
उन्होंने आगे कहा कि वह दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं और इसे रचनात्मक स्वतंत्रता के समर्थन के रूप में देखते हैं।
फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ में परेश रावल, जाकिर हुसैन, अमृता खानविलकर, स्नेहा वाघ और नमित दास जैसे कलाकार नजर आएंगे। यह फिल्म 31 अक्टूबर को देशभर में रिलीज़ होगी।





