
हर वर्ष वैशाख मास की पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। यह दिन न केवल बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए, बल्कि पूरे भारतवर्ष में आस्था और श्रद्धा से मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इसी पुण्य तिथि पर भगवान गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था। साथ ही, सात वर्षों की कठिन तपस्या के बाद उन्हें बिहार के बोधगया में बोधिवृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन कुशीनगर में उन्हें महापरिनिर्वाण भी प्राप्त हुआ था।
यह दिन केवल उपासना के लिए ही नहीं, बल्कि स्नान, ध्यान और दान के माध्यम से आत्मिक शुद्धि और कल्याण प्राप्त करने का अवसर भी है। यदि आप किसी पवित्र नदी में स्नान नहीं कर सकते तो घर पर ही जल में कुछ बूंदें गंगाजल डालकर स्नान करें। साथ ही, अपनी श्रद्धा और सामर्थ्यानुसार दान अवश्य करें, जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो।
बुद्ध पूर्णिमा 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
- पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 11 मई 2025, रात 8:01 बजे
- पूर्णिमा तिथि समाप्त: 12 मई 2025, रात 10:25 बजे
- बुद्ध पूर्णिमा व्रत एवं पर्व की तिथि: 12 मई 2025 (सोमवार)
बुद्ध पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
गौतम बुद्ध, जिनका जन्म नाम सिद्धार्थ गौतम था, एक महान आत्मज्ञानी और आध्यात्मिक मार्गदर्शक माने जाते हैं। उनके जीवन और उपदेशों से ही बौद्ध धर्म की स्थापना हुई। इस दिन को उनके जन्म, ज्ञान प्राप्ति और निर्वाण से जोड़ा जाता है, जिससे यह तिथि और भी पवित्र मानी जाती है।
बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए बोधगया सबसे प्रमुख तीर्थ स्थल है, जहां उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। इसके अतिरिक्त लुंबिनी (जन्मस्थान), सारनाथ (प्रथम उपदेश) और कुशीनगर (महापरिनिर्वाण) को भी अत्यंत पावन स्थल माना जाता है।
यह दिन आत्मचिंतन, संयम, और सेवा का है। यदि आप भी बुद्ध की शिक्षाओं पर चलकर जीवन को अर्थपूर्ण बनाना चाहते हैं, तो इस बुद्ध पूर्णिमा पर ध्यान, सत्संग, दान और संयम का पालन अवश्य करें।







