
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में नवादा जिले की हिसुआ सीट पर इस बार भाजपा और कांग्रेस के बीच रोमांचक मुकाबला देखने को मिल रहा है। कांग्रेस के सामने अपने पुराने गढ़ को बचाने की चुनौती है, जबकि भाजपा हर हाल में वापसी करने के मूड में है।
हिसुआ विधानसभा क्षेत्र का गठन 1957 में हुआ था और 2008 के परिसीमन के बाद यह बिहार के 243 विधानसभा क्षेत्रों में से 236वां क्षेत्र है। यह नवादा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है।
तिलैया नदी के दाहिने किनारे स्थित हिसुआ मुख्य रूप से कृषि प्रधान क्षेत्र है, जहां कुछ छोटे उद्योग भी लोगों की आजीविका का साधन हैं। यह इलाका धार्मिक रूप से भी समृद्ध है — मदनेश्वर महादेव मंदिर, वाट थाई मंदिर में 108 फीट ऊंची बुद्ध प्रतिमा, और जय ज्वालानाथ मंदिर यहां के प्रमुख आस्था केंद्र हैं।
राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो हिसुआ की जनता ने अब तक केवल छह नेताओं को विधानसभा भेजा है, और अब तक केवल तीन राजनीतिक दलों को ही मौका दिया है।
सबसे अधिक जीत दर्ज करने वाले नेता आदित्य सिंह रहे हैं, जिन्होंने तीन बार कांग्रेस और तीन बार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की।
अब तक कांग्रेस ने 9 बार, भाजपा ने 3 बार, जनता पार्टी ने 1 बार, और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 3 बार इस सीट पर जीत दर्ज की है।
2020 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 15 साल बाद वापसी की थी, जब नीतू कुमारी ने भाजपा के अनिल सिंह को हराकर सीट जीती थी। अब 2025 में दोनों नेताओं के बीच फिर से सीधा मुकाबला होने जा रहा है।
इस बार हिसुआ सीट से 14 उम्मीदवार मैदान में हैं। कांग्रेस ने फिर से नीतू कुमारी पर भरोसा जताया है, जबकि भाजपा ने तीन बार के विधायक अनिल सिंह को टिकट दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुकाबला बेहद कांटे का रहेगा। एक तरफ भाजपा अपने संगठन और केंद्र सरकार की योजनाओं के दम पर मैदान में है, वहीं कांग्रेस अपनी हालिया जीत को दोहराने की पूरी कोशिश में है।





